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गंभीर संकट से पूर्ण इलाज की ओर कदम: भगवंत मान सरकार ने Punjab में रेबीज़ के खतरे से निपटने के लिए किए व्यापक सुधार

January 16, 2026By The Daily Slate

सालों से पंजाब में कुत्ते के काटने की घटनाएं सिर्फ एक जख्म तक सीमित नहीं रहती थीं, बल्कि हजारों परिवारों के लिए जानलेवा खतरा बन जाती थीं। हर साल राज्य में कुत्तों के काटने के करीब तीन लाख मामले सामने आते हैं, जिनमें रेबीज़ का जोखिम बना रहता है। रेबीज़ एक ऐसी बीमारी है जो इलाज न होने पर 100 प्रतिशत घातक होती है, हालांकि समय पर टीकाकरण से इसे पूरी तरह रोका जा सकता है।

पहले एंटी-रेबीज़ टीकाकरण (ARV) की सुविधा केवल 48 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक सीमित थी। इस वजह से पीड़ितों—जिनमें ज़्यादातर बच्चे, बुजुर्ग और रोज़ दिहाड़ी पर काम करने वाले मज़दूर होते थे—को दूर-दराज़ के अस्पतालों में जाना पड़ता था। घंटों इंतज़ार, मज़दूरी का नुकसान और कई बार पाँच खुराकों वाले टीकाकरण कोर्स को बीच में छोड़ देना आम बात थी। यह एक ऐसी प्रणाली थी जो सीधे तौर पर कीमती मानव जीवन को जोखिम में डाल रही थी।

मान सरकार ने बदली तस्वीर

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई में पंजाब सरकार ने इस गंभीर जन स्वास्थ्य समस्या का निर्णायक समाधान किया है। पिछले तीन वर्षों में राज्य भर में स्थापित किए गए 881 आम आदमी क्लीनिकों के व्यापक नेटवर्क का उपयोग करते हुए सरकार ने प्राथमिक स्तर पर ही एंटी-रेबीज़ टीकाकरण सेवाएं सुनिश्चित कर दी हैं। यह कदम पंजाब के जन स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।

इस बारे में जानकारी देते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा,

“मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की दूरदर्शी अगुवाई में पंजाब सरकार हर नागरिक को सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है। हर साल कुत्तों के काटने के लगभग तीन लाख मामले सामने आते हैं। 881 आम आदमी क्लीनिकों में एंटी-रेबीज़ टीकाकरण सेवाएं शुरू करके हमने जन स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित किया है। लोगों को उनके घरों के नज़दीक समय पर और पूरा इलाज देकर हम एक सुरक्षित और स्वस्थ पंजाब का निर्माण कर रहे हैं।”

आम आदमी क्लीनिक बने प्राथमिक स्वास्थ्य की रीढ़

आम आदमी क्लीनिक पहले ही पंजाब की प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली की रीढ़ बन चुके हैं। इन क्लीनिकों में अब तक 4.6 करोड़ से अधिक ओपीडी विज़िट दर्ज की जा चुकी हैं और रोज़ाना करीब 70,000 मरीज़ों को इलाज मिलता है।

अब सभी आम आदमी क्लीनिकों में एआरवी सेवाओं को शामिल करके यह सुनिश्चित कर दिया गया है कि कुत्ते के काटने का मतलब अब न घबराहट है, न खर्च और न ही देरी। पीड़ितों को उनके घर के नज़दीक, बिना लंबी कतारों के और बिना किसी आर्थिक बोझ के पूरी पाँच खुराकों वाला टीकाकरण कोर्स मुफ्त उपलब्ध कराया जा रहा है।

तेज़ इलाज, कम खतरा

पिछले चार महीनों में हर महीने औसतन 1,500 कुत्ता काटने के पीड़ित आम आदमी क्लीनिकों में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। खास बात यह है कि मरीज़ के क्लीनिक पहुंचने के कुछ ही मिनटों के भीतर इलाज शुरू कर दिया जाता है, जिससे रेबीज़ से होने वाली मौतों का खतरा काफी हद तक कम हो गया है।

हजारों लोग अब पूरा टीकाकरण शेड्यूल सफलतापूर्वक पूरा कर रहे हैं, जो पहले अस्पताल-केंद्रित व्यवस्था में सुनिश्चित नहीं हो पाता था।

मरीज़ों के अनुभव में बड़ा बदलाव

यह सुधार सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीज़ों के अनुभव में भी बड़ा बदलाव लेकर आया है। पहले इलाज का अनुभव तनावपूर्ण, खर्चीला और अनिश्चित होता था, जिसे अब एक संगठित और भरोसेमंद जन स्वास्थ्य सुरक्षा प्रणाली में बदल दिया गया है। पीड़ितों को तुरंत देखभाल, सही मार्गदर्शन, फॉलो-अप और निरंतर चिकित्सकीय निगरानी मिल रही है।

खास तौर पर ग्रामीण इलाकों के परिवारों और रोज़ाना दिहाड़ी करने वाले श्रमिकों के लिए यह बदलाव बिना किसी अतिरिक्त जोखिम के सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है।

बेहतर शासन का उदाहरण

यह सुधार भगवंत मान सरकार के उस व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें जन स्वास्थ्य जोखिमों की पहचान, फ्रंटलाइन स्वास्थ्य प्रणालियों को मज़बूत करना और नागरिकों की सुविधा व सम्मान को नीति निर्माण के केंद्र में रखना शामिल है।

पहले उपेक्षित इस आपात स्थिति को प्राथमिक रोकथाम देखभाल में बदलकर पंजाब सरकार ने यह साफ कर दिया है कि मज़बूत नेतृत्व और सशक्त प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था कैसे जान बचा सकती है, असमानता को कम कर सकती है और राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली में जनता का भरोसा बहाल कर सकती है।