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Delhi Blast: Dr. Umar Nabi कैसे बना Suicide Bomber, कैसे चला रहा था Brainwash Network — पूरी कहानी

November 19, 2025By The Daily Slate

दिल्ली के लाल किले के सामने 10 नवंबर को हुए I-20 कार ब्लास्ट ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इस धमाके में 15 लोगों की मौत हो गई और 20 से ज्यादा लोग घायल हुए। बाद में पता चला कि यह धमाका किसी एक्सिडेंट की वजह से नहीं, बल्कि एक प्लान्ड सुसाइड अटैक था, जिसे अंजाम दिया था—डॉ. उमर नबी ने।

जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस हमले के पीछे छिपा एक बड़ा टेरर मॉड्यूल सामने आ रहा है। इस मॉड्यूल का कनेक्शन फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी, कई डॉक्टरों और देश के अलग-अलग राज्यों से जुड़े लोगों से मिल रहा है।

कैसे शुरू हुई जांच और क्या मिला?

NIA और दूसरी एजेंसियों ने बताया कि डॉ. उमर सिर्फ खुद को उड़ाने नहीं आया था, वह अपने जैसे और भी सुसाइड बॉम्बर तैयार कर रहा था। इसके लिए वह लगातार वीडियो बनाकर अलग-अलग युवाओं को भेजता था।

जांच में गिरफ्तार हुए लोगों के मोबाइल से कुल:

  • 70 से ज्यादा वीडियो
  • जिनमें से 12 वीडियो उमर ने खुद शूट किए

ये वीडियो 11 युवाओं को भेजे गए थे। इनमें:

  • 7 कश्मीरी मूल के
  • सभी का लिंक अल-फलाह यूनिवर्सिटी से
  • बाकी 4 युवक—UP, Kerala और Karnataka के रहने वाले मिले

उमर इन वीडियो में युवाओं को समझाता था कि यह कोई “Suicide Attack” नहीं है, बल्कि “Shahadat Operation” है—यानी अपनी जान देकर ‘धर्म’ के लिए लड़ाई।

आमिर रशीद ने दिलवाई कार, लेकिन खुद नहीं बनना चाहता था सुसाइड बॉम्बर

आमिर रशीद अली नाम के युवक ने उमर को I-20 कार दिलवाई, लेकिन वह खुद हमला नहीं करना चाहता था।
जब उमर को यह बात पता चली तो उसने उसी को ब्रेनवॉश करने वाले वीडियो भेजने शुरू कर दिए।

एजेंसियों का शक है कि उमर एक पूरी फिदायीन (Fidayeen) टीम बना रहा था और उसका टारगेट अलग-अलग राज्यों के युवा थे।

पुलवामा में उमर की संदिग्ध हरकतें

धमाके से करीब दो हफ्ते पहले उमर अपने पुलवामा के कोइल गांव गया था।
वह अपने भाई जहूर इलाही को एक मोबाइल फोन देकर बोला:

“अगर मेरे बारे में कोई खबर आए… ये फोन पानी में फेंक देना।”

और हुआ भी यही।
9 नवंबर को उसके दोस्तों की गिरफ्तारी की खबर आई तो जहूर डर गया और उसने फोन तालाब में फेंक दिया

बाद में यह फोन मिल गया—खराब था, लेकिन एजेंसियों ने इसमें से एक बड़ा वीडियो रिकवर कर लिया, जिसमें उमर खुद कह रहा था:

“यह suicide नहीं, martyrdom operation है।”

धमाके से पहले 10 दिनों तक खुद को कमरे में बंद रखा

उमर ने नूंह की हिदायत कॉलोनी में 10 दिन खुद को एक कमरे में बंद रखा

  • वह टॉयलेट के लिए भी बाहर नहीं निकला
  • न नहाया, न कपड़े बदले
  • कमरे में ही गंदगी फैल गई
  • सिर्फ रात में थोड़ी देर खाने के लिए बाहर निकलता था

जांच एजेंसियों के अनुसार यह दिखाता है कि उमर का ब्रेनवॉश 100% हो चुका था, वह एक कट्टर सुसाइड मिशन के लिए खुद को पूरी तरह तैयार कर चुका था।

अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर ED का शिकंजा

इस केस में सबसे बड़ा नाम अल-फलाह यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद का सामने आया है।

ED ने:

  • दिल्ली और हरियाणा में 25 ठिकानों पर छापेमारी की
  • करोड़ों रुपये की फंड हेराफेरी, फर्जी मान्यता (fake accreditation) और
  • 9 शैल कंपनियों का नेटवर्क पकड़ा

छापेमारी के बाद यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद सिद्दीकी को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
उनके घर से 48 लाख रुपये कैश भी मिला।

गिरफ्तार लोगों में अब तक:

  • 8 आरोपी, जिनमें
  • 5 Doctor हैं
    जो सीधे या इंडाइरेक्टली इस टेरर नेटवर्क से जुड़े पाए गए।

डॉ. शाहीन मैडम सर्जन का रोल

एजेंसियों ने एक और बड़ा नाम पकड़ा—डॉ. शाहीन सईद, जिसे “Madam Surgeon” कहा जाता था।
उनके पास:

  • 7 बैंक अकाउंट
  • 3 पासपोर्ट
  • और हाल ही में एक नया पासपोर्ट अल-फलाह यूनिवर्सिटी के पते से बनाने की कोशिश

इनका रोल इस मॉड्यूल में फाइनेंशियल और लॉजिस्टिक सपोर्ट से जुड़ा माना जा रहा है।

जम्मू की भलवाल जेल में भी छापेमारी

दिल्ली ब्लास्ट के बाद जम्मू की हाई सिक्योरिटी कोट भलवाल जेल में भी छापा पड़ा।
शक है कि जेल के अंदर से भी कुछ कैदी आतंकी मॉड्यूल को निर्देश भेज रहे थे।
इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, पेपर और नंबरों का डाटा जुटाया जा रहा है।

क्या कश्मीर में सऊदी अरब वाला मॉडल चल सकता है?

कई सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि कश्मीर में बढ़ती कट्टरपंथी सोच को रोकने के लिए सऊदी अरब का मॉडल लागू किया जा सकता है।
सऊदी ने 20 साल पहले:

  • सही इस्लामी शिक्षा
  • अच्छे धर्मगुरुओं की मदद
  • और awareness camps
    के जरिए कट्टरपंथ को काफी हद तक खत्म किया था।

विशेषज्ञों का मानना है कि यही तरीका कश्मीर के युवाओं को ब्रेनवॉश से बचा सकता है।

निष्कर्ष: यह सिर्फ एक ब्लास्ट नहीं, एक पूरा नेटवर्क है

दिल्ली ब्लास्ट ने यह साफ कर दिया है कि:

  • यह हमला एक अकेले शख्स का काम नहीं था
  • बल्कि White Collar Terror Network का हिस्सा था
  • जिसमें डॉक्टर, यूनिवर्सिटी, शैल कंपनियाँ और कई राज्यों के युवा जुड़े थे
  • उमर नबी सिर्फ पहला चेहरा था… वह कई और सुसाइड बॉम्बर तैयार कर रहा था

जांच जारी है और एजेंसियाँ हर दिन नई कड़ियाँ जोड़ रही हैं।