Search

BREAKING
लखनऊ में महिला आरक्षण मुद्दे पर उबाल—25 हजार महिलाओं का जन आक्रोश मार्च, सीएम योगी ने विपक्ष पर साधा निशाना स्मार्ट मीटर को लेकर एक्शन में UPPCL, चार सदस्यीय तकनीकी कमेटी बनी, IIT और रिसर्च एंड डेवलपमेंट के अधिकारी शामिल सकौती में जाटों का जमावड़ा: CM मान समेत कई दिग्गज पधारे, मंच से गरजे जाट नेता-पहचान व सम्मान से समझौता नहीं ‘पहले आस्था को अंधविश्वास कहकर अपमानित किया गया’, CM योगी का विपक्ष पर तीखा प्रहार UP पुलिस भर्ती परीक्षा में विवादित प्रश्न पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद सख्त, हो सकती है कार्रवाई CM योगी की मां पर विवादित टिप्पणी करने वाले मौलाना के खिलाफ कार्रवाई, पुलिस ने दर्ज की FIR CM योगी आदित्यनाथ आज आएंगे गाजियाबाद, कई मार्गों पर रहेगा डायवर्जन भगवान नरसिंह की रंगभरी शोभायात्रा में CM योगी बोले- ‘UP भारत की आत्मा है’ होली पर गोरखनाथ मंदिर में CM योगी का जनता दर्शन, इलाज के लिए आर्थिक मदद का भरोसा CM योगी आद‍ित्‍यनाथ ने की भाजपा काशी क्षेत्र की समन्वय बैठक, तैयार‍ियों की परखी हकीकत

Padma Shri Jatinder Singh Shanti बने Punjab Human Rights Commission के नए सदस्य — 70,000 से ज्यादा लावारिस शवों का सम्मानजनक अंतिम संस्कार कर चुके हैं, ambulance और disaster relief services के लिए भी मशहूर

November 22, 2025By The Daily Slate

पंजाब सरकार ने समाज सेवा में बड़ा नाम रखने वाले और Padma Shri से सम्मानित जतिंदर सिंह शंटी को पंजाब मानवाधिकार आयोग का नया मेंबर नियुक्त किया है। यह फैसला उनके लंबे समय से किए जा रहे मानवीय कार्यों को देखते हुए लिया गया है। शंटी को पूरे देश में इंसानियत की सेवा और मृतकों के अधिकारों की रक्षा करने वाले एक प्रमुख व्यक्ति के रूप में जाना जाता है।

कौन हैं जतिंदर सिंह शंटी?

जतिंदर सिंह शंटी शहीद भगत सिंह सेवा दल के संस्थापक हैं।
वे पिछले 25 सालों से भी ज्यादा समय से लावारिस, गरीब और बेसहारा लोगों का सम्मानजनक अंतिम संस्कार कर रहे हैं।
उनके काम की वजह से ही साल 2021 में उन्हें पद्म श्री मिला।

उनके काम पर एक अंतरराष्ट्रीय डॉक्यूमेंट्री “Angels for the Dead” भी बनाई गई है, जिसमें दिखाया गया है कि किस तरह वे मृतकों के लिए सम्मान की लड़ाई लड़ते हैं।

70,000 से ज्यादा लोगों का सम्मानजनक अंतिम संस्कार

शंटी और उनकी टीम अब तक 70,000 से ज्यादा लावारिस और कमजोर वर्ग के लोगों का अंतिम संस्कार कर चुकी है।
उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान भी खतरे की परवाह किए बिना 4200 से ज्यादा कोरोना पीड़ितों के शवों का अंतिम संस्कार किया।

उनका NGO कई जरूरी सेवाएं देता है, जैसे:

  • फ्री शव वाहन (Dead Body Van)
  • Mobile Mortuary
  • फ्री अंतिम संस्कार सेवा
  • अस्थि विसर्जन की व्यवस्था
  • गरीब परिवारों को अंतिम संस्कार में मदद

उनका मानना है कि जैसे जीते जी सम्मान का हक है, वैसे ही मृत्यु के बाद भी सम्मान मिलना जरूरी है।

मरीजों के अधिकारों के लिए भी लड़ाई

जतिंदर सिंह शंटी सिर्फ मृतकों के लिए ही नहीं, बल्कि Patients’ Rights यानी मरीजों के अधिकारों के लिए भी काम करते हैं।
वे फ्री Life-Saving Ambulance Service, रेस्क्यू और इमरजेंसी हेल्प उपलब्ध करवाते हैं।

उन्होंने कई बार ऐसे निजी अस्पतालों का विरोध किया है जो बिल न देने पर मरीज या शव को रोक लेते हैं। यह सीधी मानवाधिकार उल्लंघन की श्रेणी में आता है, और शंटी ऐसे मामलों को उजागर करते रहे हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर अहम भूमिका

शंटी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के Core Group Member भी रह चुके हैं।
वह पूरे देश में लावारिस शवों के मुफ्त अंतिम संस्कार की व्यवस्था लागू करने की मांग कर चुके हैं।
इसके अलावा उन्होंने Anti-Terror Human Rights Response Unit बनाने का प्रस्ताव भी रखा—यह यूनिट आतंकवाद से जुड़े मामलों में मानवाधिकार सुरक्षा पर काम करेगी।

आपदा राहत में बड़ी भूमिका

शंटी कई बड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आपदाओं में राहत कार्य कर चुके हैं, जैसे:

  • गुजरात भूकंप
  • 2004 सुनामी
  • नेपाल भूकंप
  • चेन्नई और केरल की बाढ़

इन घटनाओं में उन्होंने न सिर्फ मेडिकल और राहत सामग्री दी, बल्कि मृतकों के शवों को सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से संभालने का काम भी किया।

रक्तदान में विश्व रिकॉर्ड बनाया

  • शंटी अब तक 106 बार रक्तदान कर चुके हैं—जो एक विश्व रिकॉर्ड है।
  • उन्होंने 200 से ज्यादा Blood Donation Camps भी लगाए हैं।
    इन कामों के लिए उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड मिल चुके हैं।

यह नियुक्ति क्यों महत्वपूर्ण है?

पंजाब सरकार की ओर से शंटी को मानवाधिकार आयोग में शामिल किया जाना इसलिए खास है क्योंकि आज भी कई जगहों पर:

  • लावारिस शवों की उपेक्षा
  • अस्पतालों में मरीजों के अधिकारों का उल्लंघन
  • आपदा के समय मृतकों के सम्मान का अभाव
    जैसे मुद्दे बने रहते हैं।

शंटी के अनुभव और मानवता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता से पंजाब में एक संवेदनशील, मजबूत और बेहतरीन मानवाधिकार ढांचा तैयार होने की उम्मीद है।