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Mann Government की ‘Watan Wapsi’ पहल सफल, Annual Passport Applications में 30% से ज्यादा कमी

September 19, 2025By The Daily Slate

कभी पंजाब के युवाओं के लिए विदेश जाना ही जिंदगी का सबसे बड़ा सपना हुआ करता था। गांव-गांव में हर किसी की जुबान पर कनाडा, अमेरिका, या ऑस्ट्रेलिया जाने की बातें होती थीं। पासपोर्ट दफ्तरों के बाहर लंबी लाइनें, वीज़ा कंसल्टेंट्स के दफ्तरों में भीड़ — ये नज़ारे आम थे। लेकिन अब तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है।

भगवंत मान सरकार की वतन वापसी पहल ने इस सोच को बदलने की शुरुआत कर दी है। अब पंजाब के युवा सिर्फ विदेश जाने के सपने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने ही राज्य में करियर और बिज़नेस बनाने की दिशा में सोचने लगे हैं। सरकार की नीतियों और रोज़गार के नए अवसरों की वजह से युवाओं का विश्वास लौट रहा है।

10 साल में सबसे बड़ी गिरावट: पासपोर्ट की डिमांड घटी

विदेश मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि पंजाब में विदेश जाने का क्रेज़ अब पहले जैसा नहीं रहा।

  • 1 जनवरी 2025 से 30 जून 2025 तक सिर्फ 3.50 लाख पासपोर्ट ही बनाए गए।
  • यह पिछले 10 सालों का सबसे कम आंकड़ा है।
  • रोज़ाना औसतन सिर्फ 1,978 पासपोर्ट आवेदन आ रहे हैं।
  • अगर यही रफ्तार रही तो 2025 के अंत तक लगभग 7.50 लाख पासपोर्ट ही बनेंगे।
  • पिछले चार सालों में यह सबसे कम संख्या होगी।

पहले जहां सालाना पासपोर्ट की गिनती 10-12 लाख तक पहुंच जाती थी, वहीं अब यह लगभग 30-35% तक गिर गई है।

सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता का असर

भगवंत मान सरकार ने युवाओं को 50,000 से ज्यादा सरकारी नौकरियां दी हैं।

  • खास बात यह है कि ये नौकरियां पूरी तरह पारदर्शी तरीके से दी गईं।
  • न सिफारिश, न रिश्वत — सिर्फ मेहनत और काबिलियत के आधार पर भर्ती।
  • इससे युवाओं का विश्वास बढ़ा कि अब मेरी मेहनत बेकार नहीं जाएगी।

पहले सरकारी नौकरियों को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लगते थे। कई बार पैसे देकर नौकरी लेने की खबरें आती थीं, जिससे युवाओं का सिस्टम पर भरोसा टूट गया था। लेकिन अब यह भरोसा दोबारा लौट रहा है।

निजी सेक्टर में भी नए मौके

सरकार ने इन्वेस्ट पंजाब प्रोजेक्ट के तहत बड़े उद्योगपतियों और निवेशकों को राज्य में निवेश करने के लिए आकर्षित किया है।

  • पॉलीकॉप जैसी बड़ी कंपनियों ने पंजाब में अपने प्लांट लगाए हैं।
  • इससे हजारों युवाओं को प्राइवेट सेक्टर में रोजगार मिल रहा है।
  • पंजाब में निवेश का नया दौर शुरू हो गया है, जिससे इंडस्ट्री और बिजनेस को बढ़ावा मिल रहा है।

विदेशी देशों की सख्ती और पंजाब का विकल्प

विदेशों में वीज़ा और इमिग्रेशन के नियम कड़े हो गए हैं, खासकर अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में।

  • वीज़ा के लिए पहले जैसी आसानी नहीं रही।
  • पढ़ाई या नौकरी के लिए बाहर जाना अब महंगा और मुश्किल हो गया है।

इस वजह से भी कई युवा अब विदेश जाने की बजाय पंजाब में ही रहने का फैसला कर रहे हैं।
जब उन्हें राज्य में ही रोज़गार, मान-सम्मान और सुरक्षा मिल रही है, तो बाहर जाने की ज़रूरत नहीं लगती।

एनआरआई के लिए नई पहलें

पहले की सरकारें एनआरआई (Non-Resident Indians) को सिर्फ डोनेशन देने वाले के रूप में देखती थीं। उनकी असली समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाता था, खासकर:

  • जमीन या प्रॉपर्टी के विवाद,
  • कानूनी झंझट,
  • सरकारी दफ्तरों में परेशानियां।

मान सरकार ने इसे बदलने के लिए कदम उठाए:

  • एनआरआई मिलनी का आयोजन, जहां एनआरआई सीधे सरकार से अपनी समस्या बता सकें।
  • स्पेशल एनआरआई डेस्क, जहां उनकी समस्याओं का तुरंत समाधान किया जाता है।

इससे एनआरआई का भरोसा बढ़ा और कई लोगों ने पंजाब वापस लौटकर बिजनेस में निवेश करना शुरू कर दिया।

आम आदमी पार्टी का वादा और उसका असर

आम आदमी पार्टी ने पंजाब की राजनीति में एंट्री ही युवाओं के मुद्दों पर की थी।
उनका नारा था: भ्रष्टाचार खत्म होगा, युवाओं को रोजगार मिलेगा।”

मान सरकार ने आते ही:

  • भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की,
  • नौकरी में पैसे का खेल खत्म किया।

इससे युवाओं को यकीन हुआ कि अब सिस्टम साफ-सुथरा हो रहा है।
अब सिर्फ मेहनत करने वालों को ही आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।

युवाओं की सोच में बदलाव: रिवर्स माइग्रेशनकी शुरुआत

पहले पंजाब के युवाओं का सपना सिर्फ विदेश जाकर सेटल होना होता था।
लेकिन अब सोच बदल रही है:

  • जो युवा विदेश जाने की तैयारी कर रहे थे, वे अब यहीं करियर बनाने की सोच रहे हैं।
  • कई ऐसे लोग भी वापस लौट रहे हैं जो पहले विदेश में काम कर रहे थे।

इसे रिवर्स माइग्रेशन कहा जा रहा है — यानी पंजाब का टैलेंट अब वापस पंजाब में लौट रहा है।
युवाओं का कहना है कि जब अपने राज्य में ही रोज़गार और इज्जत मिल रही है, तो घर छोड़ने की क्या जरूरत है।

वतन वापसीका असली मतलब

‘वतन वापसी’ सिर्फ एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव है।

  • यह पंजाब के युवाओं को यह संदेश देती है कि तुम्हारा भविष्य यहीं है।
  • यह विदेशों से लौटे युवाओं की कहानी ही नहीं, बल्कि उन लोगों की भी कहानी है जो पहले विदेश जाना चाहते थे लेकिन अब यहीं रहने का फैसला कर रहे हैं।
  • यह पंजाब को दोबारा रंगला पंजाब बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

नतीजा

  • पंजाब में अब पासपोर्ट के आवेदन घट रहे हैं।
  • विदेश जाने का क्रेज़ कम हो रहा है।
  • रोज़गार के मौके बढ़ रहे हैं।
  • एनआरआई वापस लौटकर निवेश कर रहे हैं।
  • युवाओं का विश्वास सरकार और सिस्टम पर बढ़ रहा है।

भगवंत मान सरकार की यह पहल साबित कर रही है कि अगर सही नीयत और साफ नीतियां हों तो ब्रेन ड्रेन को रोका जा सकता है।
अब पंजाब में सिर्फ लोग वापस नहीं आ रहे, बल्कि सपने और विश्वास भी लौट रहे हैं।

पंजाब का यह बदलाव आने वाले समय में राज्य की पहचान को फिर से परिभाषित कर सकता है —अब विदेश जाना ही सफलता नहीं, अपने वतन में रहकर कुछ करना ही असली कामयाबी है।