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बाढ़ से Stranded Animals को भी मिली राहत — Punjab Government और जन संघर्ष की ज़ुबानी

September 8, 2025By The Daily Slate

पंजाब में अगस्त के अंत में सतलुज और व्यास नदियों में अचानक आई भारी बाढ़ ने इंसानों से लेकर जानवरों तक को अपनी लपेट में ले लिया। इस भीषण आपदा में लगभग 1,400 से ज़्यादा गांव डूबे, 3.5 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए, और 2.5 लाख जानवर व 5.88 लाख पोल्ट्री पक्षी बाढ़ की मार झेलते रहे।

लेकिन इस तबाही के बीच इंसानों की दया का एक चमकीला सवेरा था — जहाँ सरकार और आम लोग मिलकर दूरभासी को भी बचाने की जद्दोजहद में जुट गए।

प्रमुख राहत और बचाव प्रयास अब तक का हाल:

  • 481 पशु चिकित्सा टीमें मैदान में उतारी गईं — हर टीम में एक पशु चिकित्सा अधिकारी, एक इंस्पेक्टर/फार्मासिस्ट और एक कर्मचारी शामिल था। इन टीमों ने 22,534 जानवरों का इलाज कर उनकी जान बचाई
  • कुल मिलाकर लगभग 5.16 लाख जानवरों को बचाया गया
  • 12,170 क्विंटल पशु आहार और 5,090 क्विंटल हरा व सूखा चारा वितरित किया गया, जिससे जानवरों को पोषण मिला।
  • ₹31.50 लाख इलाज और राहत कार्यों में खर्च किए गए।
  • 24×7 नियंत्रण कक्ष राज्य और ज़िला दोनों स्तर पर चालू किए गए थे, ताकि हर मदद माॅगी जा सके।
  • ड्रोन और नावों की मदद से छतों पर फंसे जानवरों का पता लगाया गया और उन्हें सुरक्षित जगहों पर पहुँचाया गया।

सरकार और संगठनों का संकल्प:

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खुद निर्देश दिए: किसी भी जीव, चाहे इंसान हो या जानवर, उसे पीछे नहीं छोड़ा जाएगा। यह संदेश Relief मिशन को एक व्यापक “लाइफ-सेविंग ऑपरेशन” में बदल गया।

कई सामाजिक संगठन जैसे कलगीधर ट्रस्ट ने भी 125 गांवों में पहुँचा- पशुओं के लिए चारा दिया, और राहत कार्य में साथ दिया।

भारी नुक़सान लेकिन उम्मीद बनी रही:

  • बाढ़ से 504 मवेशी/भैंस, 73 भेड़-बकरियाँ, 160 सुअर और 18,304 पोल्ट्री पक्षी मारे गए।
  • इससे प्रभावित कुल जानवरों की संख्या 2.52 लाख, और पोल्ट्री पक्षियों की 5.88 लाख रही।

फिर भी सरकार ने हार नहीं मानी — विशेष जल निकासी प्रणालियों से 1,000 एकड़ से ज़्यादा जलभराव वाली जमीन को सुखाया गया, जिससे पशुओं के लिए सुरक्षित ठिकाना बनाया जा सका।

ताजा अपडेट्स:

  • सरकार ने सैंड माइनिंग की नीति बदली: किसान अब अपने खेतों से फसल नुकसान वाली बालू और मिट्टी निकाल सकते हैं — इसे बेचकर उनकी थोड़ी ही राहत हो सकती है।
  • Milkfed Punjab (Verka) ने राहत और रिकवरी ऑपरेशन शुरू किया — बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों और उनके पशुओं की मदद की जा रही है।
  • NRIs (UK, France, Austria) ने भी हाथ बढ़ाया — उन्होंने प्रभावित क्षेत्र के डेयरी किसानों के लिए भैंसें और घरों की मरम्मत सहायता देने का ऐलान किया है।
  • आज (8 सितंबर) अलर्ट: 48 लोगों की मौत, 2,050 गांव प्रभावित, 3.9 लाख लोग प्रभावित, 4.42 लाख एकड़ फसल नष्ट, राहत में NDRF, सेना, BSF, हेलीकॉप्टर्स और 170 नावों का प्रयोग जारी है।

अगस्त–सितंबर 2025 की पंजाब बाढ़ ने इंसानों के साथ-साथ जानवरों की दुनिया को भी तहस-नहस कर दिया। लेकिन मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार, स्थानीय प्रशासन, डॉक्टर, NGO और आम जनता ने मिलकर इस संकट को एक जीवन रक्षा मिशन बना दिया। पांच लाख से ऊपर जानवर, लाखों लोग, हर मेरा जीव, इंसान या पशु, कोई भी पीछे नहीं छोड़ा गया।

जब Compassion (दयालुता) में कोई फर्क नहीं किया जाता, तो असल में हमने अपनी Humanity (इंसानियत) को बचाया होता है।